की अब साथ चाहता हूं
बहुत हुआ विरोधी संघर्ष
अब खुशहाली चाहता हूं
देश प्रेम के लिए अब एक नवनिर्माण चाहता हूं
सच कहूं वापस एक विश्वगुरु चाहता हूं
बहुत लड़ लिए युद्ध शांति के
अब एक और क्रांति चाहता हूं
विरोधियों के मुख पर अब भारत की जयजयकार चाहता हूं
कर दिया शोर तकनीक का
बना दिए विमान है
अभी तुमने देखा क्या
यह हर भारतीय का आत्मसम्मान है
जब हर दिशा से परास्त हुए
तब लाए जैविक हथियार हो
मन की अग्नि के खातिर ही विश्व अशांति की ओर हो
भूलो मत विश्वगुरु आज भी हितरक्षी कहलाता है
महामारी से लड़ने का नित नया उपचार बतलाता है
डर में आज विरोधी समूचा
भारत की जयजयकार है
चारो ओर चारो प्रहर भारत का गुणगान है भारत का गुण गान है...🇮🇳🇮🇳
कुमुद पाण्डे।
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